एमपी पुलिस में थर्ड जेंडर की एंट्री, कलेक्टर का सर्टिफिकेट तय करेगा वह महिला या पुरुष

By S Nitin


भोपाल: मध्यप्रदेश पुलिस में अब ट्रांसजेंडर (किन्नर) भी खाकी वर्दी पहनकर अपनी सेवाएं दे सकेंगे। राज्य सरकार के गृह विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। नए नियमों के मुताबिक प्रदेश पुलिस में थर्ड जेंडर को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत आरक्षण और पात्रता दी गई है और इनकी फिटनेस की श्रेणी तय करने के संबंध में भी फैसला ले लिया है। पुलिस भर्ती एवं चयन शाखा ने इन्हें अलग से आरक्षण देने के बजाय ओबीसी श्रेणी में शामिल किया है जिससे इनकी नियुक्ति अब आरक्षण रोस्टर के आधार पर होगी। एमपी पुलिस में पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा 2023 में एक भी थर्ड जेंडर उम्मीदवार सिलेक्ट नहीं हुआ है लेकिन पुलिस आरक्षक भर्ती 2025, सब इंस्पेक्टर परीक्षा 2025 और क्लेरिकल स्टाफ परीक्षा 2025 के लिए कई किन्नर उम्मीदवारों ने आवेदन किए हैं। इन आवेदकों की मेडिकल और फिटनेस श्रेणी को लेकर संशय बना हुआ था। सरकार ने उभयलिंगी की परिभाषा को अब स्पष्ट कर दिया है ै। इसके दायरे में उभय-पुरुष, उभय-स्त्री, अंत:लिंग विभिन्नताओं वाले व्यक्ति, किन्नर, हिजड़ा, अरावाणी और जोगता जैसी सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान रखने वाले सभी आवेदक शामिल होंगे। 

कलेक्टर का प्रमाण-पत्र होगा अनिवार्य

भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने वाले उभयलिंगी उम्मीदवारों के लिए जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) द्वारा जारी पहचान प्रमाण-पत्र सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होगा। यह सर्टिफिकेट मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर बनाया जाएगा।  गृह विभाग की अधिसूचना के अनुसार, यदि किसी उम्मीदवार के कलेक्टर द्वारा जारी प्रमाण-पत्र में पुरुष अंकित है तो उस पर मेल केंडिडेट के लिए तय शारीरिक मानक और नियम लागू होंगे। वहीं यदि प्रमाण-पत्र में महिला अंकित है तो फीमेंल कैंडिडेट के लिए तय नियम लागू होंगे। लिखित परीक्षा में सफल होने के बाद उम्मीदवारों का शारीरिक फिटनेस टेस्ट (दौड़, लंबाई आदि) उनके प्रमाण-पत्र में दर्ज श्रेणी (महिला या पुरुष) के आधार पर ही लिया जाएगा । यह सर्टिफिकेट न केवल भर्ती के समय बल्कि चयन के बाद ट्रेनिंग के लिए भी आधार बनेगा। इसी के जरिए यह तय होगा कि चयनित उम्मीदवार की ट्रेनिंग पुरुषों के बैच में होगी या महिलाओं के साथ।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश 

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को पुलिस भर्ती में किन्नरों को अवसर देने के निर्देश दिए थे। तमिलनाडु 2017 में किन्नरों की भर्ती करने वाला पहला राच्य बना था, जिसके बाद छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र, बंगाल और कर्नाटक जैसे राच्यों ने भी इस दिशा में कदम उठाए हैं। अब मध्यप्रदेश भी इस सूची में शामिल होकर ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा से जोडऩे की कोशिश कर रहा है। पीएचक्यू की चयन एवं भर्ती शाखा के डीआईजी वीरेंद्र सिंह के अनुसार थर्ड जेंडर को आगामी परीक्षाओं के लिए सरकारी आदेश के अनुसार ओबीसी के दायरे में ही रखा गया था।